उत्तराखण्ड

देश शहीद सैनिकों के सर्वोच्च बलिदान का ऋणी

स्वर्णिम विजय वर्ष पर ग्रेनेडियर्स रेजीमेंट द्वारा आयोजित किया गया कार्यक्रम
देहरादून । जन केसरी
वर्ष 1971 के भारत—पाक युद्ध में भारतीय सेना की जीत के 50 साल के पूरे होने के अवसर (स्वर्णिम विजय वर्ष) पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की श्रृंखला में ग्रेनेडियर्स की पांचवी रेजीमेंट द्वारा स्वर्णिम पराक्रम वर्ष कार्यक्रम आयोजित किया गया। ग्रेनेडियर्स के कर्नल ऑफ दि रेजीमेंट के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम दून में निवास करने वाले ग्रेनेडियर्स रेजीमेंट के पूर्व सैनिकों व वीर नारियों ने भी शिरकत की। इनमें वह सैनिक भी शामिल हुए जिन्होंने वर्ष 9171 के युद्ध में भाग लिया था।


कार्यक्रम में रिटायर ले. जनरल शक्ति गुरुंग ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। उन्होंने बयोवृद्ध पूर्व सैनिकों व वीर नारियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि देश का हर नागरिक सेना के उन शहीदों के सर्वो”ा बलिदान का ऋणी है जिनकी वजह से 71 की जंग में भारत को ऐतिहासिक जीत मिली थी। इस युद्ध में ग्रेनेडियर्स रेजीमेंट की बहादुरी की जिक्र भी उन्होंने किया। बताया कि रेजीमेंट की पंद्रह बटालियनों ने दुश्मन को धूल चटाई थी। ग्रेनेडियर्स रेजीमेंट के मेजर होशियार सिंह को परमवीर चक्र मिला था। भारत—पाकिस्तान के बीच तीन दिसंबर 1971 से शुरू हुआ युद्ध 16 दिसंबर तक चला था। जिसमें भारतीय सश बलों ने पाकिस्तान सेना पर शानदार जीत हासिल की थी। इस युद्ध के बाद नए राष्ट्र के रूप में बांग्लादेश का उदय हुआ था। मेजर राजकुमार, सुबेदार मोहिंदर सिंह, नायब सुबेदार गजपाल सिंह, लक्ष्मी देवी आदि पूर्व सैनिक व वीर नारियां भी कार्यक्रम में शामिल हुई।

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