उत्तराखण्ड

फर्जी पास बनाकर कर रहा था बस में फ्री यात्रा

देहरादून: रुड़की से देहरादून के बीच वर्षों से रोडवेज बस में मुफ्त यात्रा कर रहा कथित सचिवालय कर्मी रोडवेज चेकिंग टीम को चकमा देकर फरार हो गया। हालांकि, उसका फर्जी पास टीम के हाथ लग गया। जिसमें उसने खुद को उत्तराखंड परिवहन विभाग सचिवालय परिसर में कनिष्ठ सहायक बताया है और मुख्य सचिव एस रामास्वामी को प्रमुख सचिव दर्शाते हुए हस्ताक्षर किए हुए हैं। रोडवेज प्रबंध निदेशक बृजेश संत ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के आदेश दिए हैं।

मामला रुड़की डिपो की बस का है। मंगलवार को चेकिंग टीम के निरीक्षक इसरार अली बिहारीगढ़ में चेकिंग कर रहे थे। बस में रुड़की से दून तक एक यात्री का स्टाफ पास बनाया हुआ था। निरीक्षक ने पास चेक किया तो वह फर्जी लगा। उक्त पास पर नाम तो परिवहन विभाग का दर्ज था, मगर चिह्न परिवहन निगम (रोडवेज) का बना हुआ था। यात्री का नाम राशिद अली पुत्र आसिफ अली दर्ज था। पास की वैधता 12 दिसंबर 2017 दर्ज थी। इस पर यात्री का फोटो भी लगा हुआ था और पता मकान संख्या-204, रामपुर चुंगी, रुड़की, जिला-हरिद्वार दर्ज था। कथित सचिवालय कर्मी की सेवानिवृत्ति की तिथि 21 अगस्त 2052 दर्ज थी।

इससे पहले कि चेकिंग टीम आरोपी से कुछ पूछताछ करती वह बस से कूदकर फरार हो गया। परिचालक ने टीम को बताया कि आरोपी कई वर्षों से पास के जरिये रुड़की-देहरादून के बीच मुफ्त यात्रा कर रहा है। रोडवेज ने सचिवालय में जानकारी की तो पता चला कि आरोपी पूर्व में बतौर पीआरडी जवान वहां तैनात रह चुका है। महाप्रबंधक संचालन दीपक जैन ने बताया कि प्रबंध निदेशक ने आरोपी के विरुद्ध एफआइआर के आदेश दिए हैं।

परिचालकों को नहीं जानकारी

हाल के दिनों में यह दूसरा मामला है, जब रोडवेज बस में कोई यात्री फर्जी पास पर पकड़ा गया। इससे पहले ऋषिकेश में एक यात्री रोडवेज के कुली के फर्जी पास पर पकड़ा गया था। वह लक्सर का रहने वाला था। इन मामलों से साफ है कि परिचालकों को असली व फर्जी पास में अंतर नहीं पता। पास में परिवहन विभाग के साथ रोडवेज का लोगो था, लेकिन परिचालक यह तक नहीं पकड़ पाए। रोडवेज प्रबंधन ने सभी परिचालकों को पास की पहचान के लिए प्रशिक्षण देने की बात कही है।

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