
पत्रकारिता की आड़ में निजी स्वार्थ? रुड़की में यूपी सिंचाई विभाग और अखबार इंचार्ज के बीच ठनी।
जन केसरी, देहरादून। अपना काम बनता भाड़ में जाए जनता वाली कहावत तो आप सभी ने सुना ही होगा। लेकिन जब अपना काम ना बने तो दूसरे के पीछे कैसे हाथ पैर धोकर पड़ा जाता है यह जानने के लिए इस खबर को पूरी पढ़नी होगी।
हरिद्वार जिले के रुड़की में कुछ प्रमुख राष्ट्रीय अखबार है। जिसमें अमर उजाला, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान, शाह टाइम्स आदि शामिल हैं। इसके अलावा द टाइम्स ऑफ इंडिया, द हिन्दुस्तान टाइम्स और द ट्रिब्यून अखबार भी मिलता है। अब मैं बात कर रहा हूं एक अखबार के इंचार्ज के बारे में। जो हरिद्वार जिले के स्थानीय निवासी हैं। उन्होंने कुछ माह पहले रुड़की में यूपी सिंचाई विभाग के एक आवास अपने नाम लेने के लिए हथकंडे अपनाने शुरु किए। ताकि वह इस आवास को लेकर किराये पर दें सकें। इस बीच एक महिला पुलिस अधिकारी का ट्रांसफर भी दूसरी जगह से रुड़की हो गया। ऐसे में उस अधिकारी को भी यूपी सिंचाई विभाग के आवास में कमरा चाहिए था। क्योंकि पुलिस अधिकारी शुरु से ही यूपी सिंचाई विभाग के आवासों में ही रहते आ रहे हैं। नियमानुसार सरकारी अधिकारी को ही प्राथमिकता देने का विभाग के पास प्रावधान भी है। ऐसे में उसने अखबार के इंचार्ज के नाम जो आवास होने थे मना कर दिया। इसके बाद साहब इतने नाराज हो गए कि विभाग के खिलाफ अभियान तक छेड़ डाला। दूसरों के ईमानदारी पर सवाल उठाने लगे। यह चर्चा पिछले 15 दिनों से रुड़की में खूब चल रही है।




