
संवादाता जनकेसरी | उत्तर प्रदेश की ग़ाज़ियाबाद पुलिस ने सांप्रदायिक सद्भावना तोड़ने के आरोप में ट्विटर और कई पत्रकारों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की है.पाँच जून को एक मुस्लिम बुज़ुर्ग पर हमले के मामले में यह कार्रवाई की गई है. बीबीसी संवाददाता दिलनवाज़ पाशा से ग़ाज़ियाबाद पुलिस ने एफ़आईआर की पुष्टि की है.हालाँकि अब्दुल समद नाम के एक उस बुज़ुर्ग ने एक वीडियो में दावा किया है कि उनकी दाढ़ी काटी गई और ‘वंदे मातरम’ के साथ जय श्रीराम बोलने पर मजबूर किया गया था.अब्दुल समद ने ये आरोप भी लगाया था कि उन्हें जंगल की ओर ले जाया गया था और वहीं बंधक बनाकर रखा गया था.
लेकिन ग़ज़ियाबाद पुलिस ने इसमें किसी भी तरह के सांप्रदायिक एंगल को ख़ारिज किया है. पुलिस की एफ़आईआर में पत्रकार राना अयूब, सबा नक़वी और मोहम्मद ज़ुबैर नामज़द अभियुक्त के तौर पर शामिल हैं.इसके अलावा ऑनलाइन न्यूज़ वेबसाइट ‘द वायर’, कांग्रेस नेता सलमान निज़ामी, समा मोहम्मद और मस्कूर उस्मानी को भी नामज़द अभियुक्त बनाया गया है. इन पर आरोप है कि इन्होंने बिना तथ्य की पुष्टि किए इस मामले को सांप्रदायिक रंग दिया.पुलिस का कहना है कि ट्वीट्स का मक़सद सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ना था. एफ़आईआर के अनुसार ये ट्वीट्स हज़ारों बार रीट्वीट किए गए.