
चीनी सेना ने पकड़ी थी पूरी टीम, डोभाल बोले- लगा करियर खत्म
रुड़की , जन केसरी । राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ने शनिवार को आईआईटी रुड़की के दीक्षांत समारोह में अपने शुरुआती खुफिया करियर का एक अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि सिक्किम में सीमा से जुड़े एक मिशन के दौरान उनकी टीम के चीनी सुरक्षा बलों के कब्जे में चले जाने की सूचना ने उन्हें बेहद चिंतित कर दिया था। उस समय उन्हें लगा था कि उनका करियर खत्म हो गया और अब उन्हें कोई दूसरा पेशा तलाशना पड़ेगा। हालांकि, बाद में हुई जांच में उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराया गया।
डोभाल ने बताया कि उस समय वह युवा आईपीएस अधिकारी थे और खुफिया कार्य में नए थे। सिक्किम में उनकी तैनाती ऐसे दौर में हुई थी, जब क्षेत्र भारत के साथ विलय की प्रक्रिया से गुजर रहा था। उनकी जिम्मेदारी में सीमा पर चीनी सैन्य गतिविधियों से जुड़ी खुफिया जानकारी जुटाना भी शामिल था। उन्होंने बताया कि सीमा क्षेत्र में एक खुफिया टीम को मिशन पर भेजा गया था। निर्धारित समय तक टीम वापस नहीं लौटी। कई दिन गुजरने के बाद भी सदस्यों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली। हिमस्खलन जैसी किसी घटना की सूचना भी नहीं थी, जिससे टीम के लापता होने का कारण समझा जा सके। बाद में मुख्यालय से सूचना मिली कि टीम को चीनी सुरक्षा बलों ने पकड़ लिया है। डोभाल के मुताबिक, चीनी सुरक्षा बलों ने टीम के सदस्यों से पूछताछ की और बाद में उन्हें वापस भेज दिया। उन्होंने कहा कि संभवत: बातचीत या किसी तरह की वार्ता के बाद टीम की रिहाई हुई थी। इसके बाद पूरे घटनाक्रम की जांच शुरू हुई। उन्होंने बताया कि उस समय उन्हें आशंका थी कि इस घटना की जिम्मेदारी उन पर आएगी। उन्होंने कहा कि वह बीस के दशक में थे और उन्हें लगा था कि अब उनके सामने नया करियर शुरू करने के अलावा कोई रास्ता नहीं होगा। हालांकि, जांच में सामने आया कि मुख्यालय से उपलब्ध कराए गए स्केच और नक्शों में कुछ खामियां और गलतियां थीं। इसी वजह से टीम के मिशन में समस्या आई थी और उन्हें दोषमुक्त कर दिया गया।
तकनीक को बताया भविष्य की प्रगति का आधार
दीक्षांत समारोह में डोभाल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि मौजूदा पीढ़ी के सामने पहले की तुलना में कहीं अधिक अवसर हैं। उन्होंने युवाओं को पिछले एक हजार वर्षों की सबसे भाग्यशाली पीढ़ियों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि पिछली पीढ़ियों ने गुलामी और अनेक सीमाओं का सामना किया, जबकि आज भारत और दुनिया में तेजी से बदलाव हो रहा है। एनएसए ने तकनीक को आने वाले समय में देश और समाज की वृद्धि तथा प्रगति का सबसे महत्वपूर्ण कारक बताया। उन्होंने आईआईटी रुड़की की विरासत की सराहना करते हुए विद्यार्थियों की सफलता में शिक्षकों और अभिभावकों के योगदान को भी महत्वपूर्ण बताया।


