स्वास्थ्य

राजधानी दून में संचालित कैंट का एक अजूबा अस्पताल, देखकर हो जाएंगे हैरान

देहरादून, जन केसरी।

राजधानी देहरादून के कैंट क्षेत्र गढ़ी में संचालित एक अजूबा अस्पताल भी है। जिसे देखकर आप हैरान हो जाएंगे। यहां एक ही कमरे व परिसर में दो-दो अस्पताल के अलावा अन्य कई विभाग भी संचालित हो रहे हैं। आप इससे अनुमान लगा सकते हैं कि यहां मरीजों का उपचार किस प्रकार से किया जाता होगा।
जी हां। कैंट बोर्ड गढ़ी द्वारा संचालित छावनी परिषद जनरल अस्पताल की बात हो रही है। कैंट बोर्ड के अधिकारियों ने इस अस्पताल को नरक बना दिया है। अपने फायदे को देखते हुए इन अधिकारियों ने एक ऐसा कदम उठाया, जिसके लिए उन्हें राष्ट्रपति अवार्ड दे देना चाहिए। अधिकारियों ने अस्पताल को पीपीई मोड पर दे दिया और अपने अस्पताल कर्मचारियों को भी दान कर दिया था। हालांकि अस्पताल के कर्मचारियों ने विरोध किया तो अपनी गलती छुपाने के लिए अधिकारियों ने आनन-फानन में जनरल अस्पताल को स्वाभिमान केंद्र में शिफ्ट कर दिया गया। अब स्वाभिमान केंद्र में संचालित अस्पताल की जो हालात है वे बता रहा हूं।
– जिस परिसर में अस्पताल का संचालन हो रहा है वे बुजुर्गों के लिए स्वाभिमान केंद्र बनाया गया है।
– परिसर के एक हॉल में दिनभर बुजुर्ग यहां उपस्थित रहते हैं।
– एक कमरे में बुजुर्गों द्वारा मूर्ति रखी गई है जहां प्रत्येक मंगलवार को विधिवत पूजा पाठ की जाती है।
– शेष एक कमरे में फिजियोथेरेपी सेंटर संचालित हो रहा है। जिसके लिए दो चिकित्सक है।
– परिसर में शेष दो छोटे-छोटे हॉल है। जो मरीजों के लिए वेटिंग रूम है।
– इसी हॉल में आयुर्वेदिक अस्पताल भी संचालित हो रहा है।
– इसी हॉल में जनरल अस्पताल भी चल रहा है।
– इसी हॉल में डिस्पेंसरी भी है।
– इसी हॉल में पैथोलॉजी लैब भी है।
– इसी हॉल में पंजीकरण काउंटर भी है।
– इसी हॉल में वैक्सीनेशन सेंटर भी संचालित हो रहा है।
– इसी हॉल में रेडियोलॉजिस्ट भी बैठते हैं।
– इसी हॉल में ईसीजी की भी व्यवस्था है।
– इसी हॉल में ओपीडी भी चल रही है।
नोट- तो है न कमाल। अब आप खूद तय करें कि कैंट बोर्ड के अधिकारी कैसे मरीजों को बेवकूफ बना रहे हैं और अपनी नाकामी छिपाने के लिए एक ही कमरे में दो दो अस्पताल चलवा रहे हैं। इससे उनका भी काम हो रहा है और हेल्थ स्टॉफ को भी वेतन मिल जा रहा है।
“धोबी का कुत्ता न घर का न घाट“
धोबी का कुत्ता न घर का न घाट का आपने ये कहावत तो सुना ही होगा। ये कहावत कैंट बोर्ड के अधिकारियों पर सटीक बैठती है। कुछ लोगों को लाभ दिलाने के चक्कर में अपने ही कर्मचारियों को बेघर कर दिया। अब ये बेचारे इधर से उधर भटक रहे हैं। इनको भी नहीं पता है कि उनका सही ठिकाना कहां हैं। अस्पताल के स्टॉफ का कहना है कि उन्हें मरीजों का उपचार करना है। अधिकारी उन्हें जहां बैठने के लिए बोलेंगे वो वहां जायेंगे। अधिकारियों की हरकत से कर्मचारी काफी नाराज हैं। वे अपने स्तर पर भी इधर से उधर शिकायत कर रहे हैं। ताकि कोई स्थाई ठिकाना मिल सके।

डाक्टर-डॉक्टर खेल रहे हैं
आयुर्वेदिक अस्पताल तो खोल दिया। लेकिन यहां ना तो कोई दवाई है और ना ही मरीज। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कुछ दिन पहले कमांड ने आयुर्वेदिक अस्पताल के बारे में जानने कि कोशिश की। ऐसे में इन्होंने एक डॉक्टर को ही मरीज के स्थान पर बैठाकर फोटो खिंचकर भेज दी। बकायदा कैंट बोर्ड के अधिकारियों ने इस फोटो को अपनी बेवसाइट व फेसबुक पेज पर भी अपलोड कर दी है। अब आप अनुमान लगा सकते हैं कि देहरादून के कैंट बोर्ड कार्यालय व अस्पताल में क्या कुछ हो रहा है।

एक डॉक्टर दूसरे डॉक्टर का उपचार करते हुए
एक डॉक्टर दूसरे डॉक्टर का उपचार करते हुए

 

 

 

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