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स्कूली शिक्षा पर केंद्रीय मंत्री और राज्य शिक्षा मंत्री एकमत नहीं, जावड़ेकर ने दी चेतावनी

नई दिल्ली। स्कूलों में शिक्षकों की कमी को लेकर केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और उनके सहयोगी मंत्री उपेंद्र कुशवाहा गुरूवार को अलग-अलग जानकारी देते दिखे। यह स्थिति तब बनी, जब दोनों ही स्कूली शिक्षा को एकीकृत करने के लिए तैयार की गई समग्र शिक्षा योजना को लांच करने पहुंचे थे। पहले बोलते हुए कुशवाहा ने कहा कि स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है। इन्हें भरे बगैर स्कूलों की गुणवत्ता को ठीक नहीं किया जा सकता है। इसके बाद बोलने के लिए आए जावड़ेकर ने पूरी बात ही पलट दी। कुशवाहा का नाम लेते हुए उन्होंने कहा कि स्कूलों में स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक है। असली दिक्कत इनकी तैनाती की है। जो गड़बड़ है। ध्यान रहे कि कुशवाहा के पास स्कूली शिक्षा का ही प्रभार है।

राज्यों को चेतावनी
केंद्रीय मंत्री जावडेकर ने कहा कि स्कूली शिक्षा में छात्र और शिक्षक का जो औसत तय किया गया है, उसके तहत तीस छात्रों पर एक शिक्षक होना चाहिए और यह संख्या मौजूद है। असली दिक्कत इनकी तैनाती को लेकर है, जो राज्यों में ठीक ढंग से नहीं लागू है। क्योंकि सभी शिक्षक राज्यों की राजधानी, बड़े शहरों और सर्वसुविधायुक्त शहरों में रहना चाहते है। इसके लिए राज्यों से कहा गया है कि वह शिक्षकों के असमान तैनाती की व्यवस्था को ठीक करें। ऐसे ना करने वाले राज्यों को हमने चेतावनी दी है, वह इसे ठीक करें, नहीं तो हम वित्तीय मदद भी नहीं देंगे। इस बीच मंच पर बैठे कुशवाहा थोड़े असहज दिखे।

2019 के चुनाव का विषय शिक्षा नहीं
केंद्रीय मंत्री जावडेकर ने समग्र शिक्षा योजना को लांच करते हुए कहा इसका उद्देश्य घर-घर तक शिक्षा को पहुंचाने का है। वैसे भी शिक्षा ना कोई राजनीति का विषय है, ना ही यह 2019 के चुनाव का कोई विषय है। उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य इसे लेकर कोई राजनीति नहीं करेंगे, बल्कि इसे जल्द से जल्द लागू करने पर जोर देंगे।

समग्र शिक्षा में स्कूलों में अब रोज एक घंटा होगा खेल
नर्सरी से 12 वीं तक स्कूली शिक्षा को एक कड़ी में पिरोने का सरकार का सपना आखिरकार पूरा हो गया। जावड़ेकर ने कहा कि अब सरकारी स्कूलों में रोज एक घंटा खेल भी होगा। इस क्रम में उन्होंने सचिन तेंदुलकर का भी नाम लिया। इनमें व्यायाम, योग और खेल-कूद सबकुछ शामिल होगा।

केंद्रीय मंत्री जावडेकर ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि इसके लिए कोई अलग से शिक्षकों की तैनाती नहीं होगी, बल्कि स्कूल के प्रत्येक शिक्षक को इसके लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। उन्होंने बाल भारती स्कूल का उदाहरण दिया और कहा कि इन स्कूलों में प्रत्येक शिक्षक व्यायाम शिक्षक के रुप में काम करते है।

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