उत्तराखण्ड

प्यासे हाथी कर रहे बस्ती व गंगा की ओर रुख!

हरिद्वार: चढ़ते पारे के साथ दिन-प्रतिदिन बढ़ रही गर्मी ने इन्सानों ही नहीं, जानवरों को भी परेशान करना शुरू कर दिया है। शहर में जहां चंद कदम चलने पर ही इन्सानों के हलक सूख रहे हैं, वहीं जंगलों में हाथियों का भी यही हाल है। जंगल में हाथियों के लिए पानी की व्यवस्था ना के बराबर होने से वह आबादी की ओर रुख करने लगे हैं। बावजूद इसके विभाग ने अब तक वाटर हॉल की भी मरम्मत नहीं कराई है।

राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क की चीला सहित अन्य रेजों में पिछले काफी दिनों से हाथी पानी की खोज में यहां-वहां भटक रहे हैं। चीला व गोहरी रेंज से हाथियों के झुंड सुबह-शाम गंगा की ओर आने शुरू हो गये हैं। बता दें कि राजाजी व हरिद्वार वन प्रभाग में हर वर्ष गर्मियों के दौरान जानवरों के सामने पानी की विकट समस्या खड़ी हो जाती है। कारण, पार्क के अंदर की नदियों में पानी सूखने लगता है। इससे सबसे अधिक परेशान हाथी होते हैं।

राजाजी के अलावा हाथियों के लिए चिड़ियापुर, झिलमिल झील, मीठीबेरी, श्यामपुर व पथरी क्षेत्र में भी पानी का संकट है। श्यामपुर रेंज के तिरछे पुल के पास तो शाम ढलते ही हाथियों का झुंड पानी की तलाश में पहुंच जा रहा हैं। यहां गंगा में प्यास बुझाने के बाद ही झुंड वापस जंगल में लौट रहा है। लेकिन, यहां हरिद्वार-नजीबाबाद हाइवे होने के कारण मानव-वन्य जीव संघर्ष का खतरा भी बना हुआ है।

पार्क प्रशासन व वन विभाग का दावा है कि जंगलों में वन्य जीवों के लिए पानी के तालाब बनाए गए हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि फिर हाथी गंगा व बस्ती की ओर क्यों आ रहे हैं। लेकिन, इस सवाल का वन विभाग व पार्क प्रशासन के पास कोई ठोस जबाव नहीं।

नदियों में वाटर लेवल कम होने के कारण हाथियों की जरूरत पूरी नहीं हो रही

राजाजी टाइगर रिजर्व के चीला रेंज के वाइल्ड लाइफ वार्डन अजय शर्मा का कहना है कि चीला, रवासन, गोहरी, मुंडाल आदि रेंज में 40 वाटर हॉल हैं। इनमें से कुछ गंगा से लगे क्षेत्र में बनाए गए हैं। लेकिन, बीच जंगल में स्थिति नदियों में वाटर लेवल कम होने के कारण हाथियों की जरूरत पूरी नहीं हो रही। इसी कारण वह गंगा की ओर आ रहे हैं।

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