उत्तराखण्ड

वाह रे कैंट बोर्ड: किसी की दुकान खाली करवानी हो तो करें इनसें संपर्क

देहरादून। जन केसरी

अगर किसी की दुकान जबरन खाली करवानी हो तो पुलिस प्रशासन के पास जाने की आवश्यकता नहीं है। अपना कैंट बोर्ड है न। दो चार दिन कैंट बोर्ड कार्यालय में प्रदर्शन करो और आपका काम हो जाएगा। भले ही ये काम गलत तरीके से क्यों ना किया जाए। जी हां। गुरुवार को एक ऐसा ही मामला प्रकाश में आया है। प्रेमनगर के स्मिथनगर में श्री खेड़ा बाबा दुर्गा माता मंदिर है। मंदिर समिति से जुड़े कुछ लोग पिछले तीन दिनों से कैंट बोर्ड कार्यालय में एक अवैध निर्माण (दुकान) ध्वस्त करने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। बुधवार शाम कैंट बोर्ड की सीईओ ने इस संबंध में आदेश भी जारी कर दिए।

अगले दिन गुरूवार को कैंट बोर्ड की टीम जेसीबी के साथ दुकान ध्वस्त करने पहुंची। इस दौरान टीम को पता चला कि जो लोग पिछले तीन दिनों से प्रदर्शन कर रहे थे उनके नाम पर भी ये जमीन से संबंधित कागज नहीं है। इधर, जिसका सालों से कब्जा है उसके पास भी संबंधित कागज नहीं है। टीम को समझ से परे था कि आखिर वे इस दुकान को ध्वस्त करने के बाद किसको कब्जा दिलाएंगे। उन्होंने पुलिस की मदद ली। लेकिन पुलिस ने पार्टी बनने से इंकार करते हुए कहा कि ये मामला सीविल का है। इधर, कुछ लोग कैंट बोर्ड पर लगातार अवैध निर्माण तोड़ने का दबाव पूरे दिन बनाते रहे। स्थानीय लोगों ने कैंट बोर्ड पर ही सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने कहा कि कैंट बोर्ड के पास ये अधिकार नहीं है कि किसी की दुकान को जबरन तोड़ते हुए दूसरे को कब्जा दिखा सकें। अगर अवैध निर्माण है तो फिर कैंट बोर्ड को ही अपने कब्जे में लेना चाहिए। फिलहाल विवाद जारी है।
इधर, कैंट बोर्ड की सीईओ तनु जैन ने कहा कि तीन दिन से लोग कार्यालय में आकर प्रदर्शन कर रहे थे। जिसके चलते कैंट बोर्ड ने अवैध निर्माण तोड़ने का निर्णय लिया है। प्रदर्शन करने वालों के पास भी उससे संबंधित कोई कागज नहीं है। ऐसे में कैंट बोर्ड इस जमीन को अपने कब्जे में लेगा।


खरीद परोख्त का चल रहा है खेल
सूत्र से मिली जानकारी के अनुसार इस दुकान पर कुछ भूमाफियाओं की नजर है। वे चाहते हैं कि दुकान को कैंट बोर्ड ना तोड़े। बाद में जिसका कब्जा है उससे डील करने के बाद उसको अपने कब्जे में लेना चाहते हैं। एक अनार सौ बीमार वाली कहावत यहां बिल्कुल फ़ीट बैठ रही है।

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