उत्तराखण्डक्राइम

राजधानी देहरादून में इन घटनाओं के कौन है हत्यारे, यह खबर पढ़ कर आप भी चौंक जाएंगे

देहरादून, जन केसरी। देहरादून में पुलिस की लचर विवेचना और ‘मनगढ़ंत कहानियों’ की पोल अदालतों में खुल रही है। हत्या जैसे जघन्य अपराधों में भी कमजोर पैरवी के कारण आरोपी बरी हो रहे हैं और असली अपराधी कानून की पकड़ से दूर हैं।

​चौंकाने वाले तथ्य:

​ केस 1 (विकासनगर): पुलिस ने दावा किया कि हत्या ईंट से हुई, लेकिन पोस्टमार्टम में सिर पर चोट ही नहीं मिली। कोर्ट ने इसे ‘मनगढ़ंत’ बताकर आरोपियों को बरी किया।

केस 2 (डोईवाला): पुलिस ने पति पर पत्नी के कत्ल का आरोप लगाया, लेकिन घर में खून का एक कतरा तक साबित नहीं कर पाई। 9 साल बाद पति बरी हुए।

केस 3 (ऋषिकेश): दो नाबालिग बहनों की हत्या और दुष्कर्म का मामला। साक्ष्यों के अभाव में हाईकोर्ट ने फांसी की सजा को पलट दिया। सवाल आज भी वही है- आखिर कातिल कौन?

केस 4 (नेहरू कॉलोनी): जिस रॉड से हत्या बताई गई, उसकी फॉरेंसिक जांच ही नहीं हुई। 10 साल जेल में रहने के बाद आरोपी बरी।

​चिंताजनक सवाल:

इन मामलों में जो साल जेल में बीते, उसका जिम्मेदार कौन? और सबसे बड़ा सवाल- उन पीड़ित परिवारों को इंसाफ कब मिलेगा जिनके अपने हमेशा के लिए चले गए?

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