उत्तराखण्ड

खर्च पर रहेगी जनता की निगाह

देहरादून: सरकारी महकमे जनता की गाढ़ी कमाई का किस तरह इस्तेमाल कर रहे हैं, शहरों में पेयजल, ड्रेनेज की बदहाली दूर हुई या नहीं, नवजात शिशु मृत्यु दर व मातृ मृत्यु दर को कम करने की दिशा में कदम बढ़े या नहीं, चिकित्सकों की कमी कब तक दूर हो सकेगी, विकास योजनाओं में बजट के सदुपयोग के रूप में छिपे ऐसे सवालों की अनदेखी महकमे नहीं कर सकेंगे। पारदर्शिता और सुशासन के वायदे के साथ सत्ता में आई नई सरकार ने अपने पहले बजट को जवाबदेह बनाया है।

यूं कहिए कि महकमों के लिए बकायदा जवाबदेही तय की गई है। उन्हें योजनावार बजट समय पर खर्च तो करना ही होगा, खर्च के भौतिक सत्यापन के बारे में बताना पड़ेगा। यानी, खर्च को लेकर महकमों को सुस्ती भारी पड़ने जा रही है। इस बार आउटकम और परफॉरमेंस बजट को मुख्य बजट का हिस्सा बनाने के साथ ही उसे सरकारी वेबसाइट के जरिए पब्लिक डोमेन में भी डाला गया है।

राज्य की नई भाजपा सरकार ने पहली बार बजट को जवाबदेह बनाने की पहल की है। चालू वित्तीय वर्ष 2017-18 के  39957.20 करोड़ के बजट पारित किया है। बजट में पहली बार 50 से अधिक महकमों के लिए आउटकम बजट के जरिए योजनावार लक्ष्य को पूरा करने के लिए जवाबदेही तय की गई है।

उन्हें संबंधित योजना के लिए निर्धारित बजट को महीनेवार खर्च तो करना ही पड़ेगा, साथ में खर्च की गुणवत्ता भौतिक सत्यापन के जरिए साबित करनी होगी। अब महकमेवार आउटकम बजट की बानगी देखिए, स्वास्थ्य महकमे को इसी वित्तीय वर्ष में राज्य के प्र्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर तक रोग के निदान के लिए की जाने वाली कई जांच मुफ्त मुहैया करानी हैं तो लोक निर्माण महकमे को नई 992 किमी सड़कों का जाल बिछाना है।

विभिन्न शहरों के लिए शुरू की गई एडीबी पोषित महत्वाकांक्षी पेयजल व ड्रेनेज योजनाएं अगले साल तक धरातल पर नजर आनी चाहिएं। चालू वित्तीय वर्ष में महकमों के लिए बजट में तय किए गए लक्ष्य की ये बानगी है। ऐसे ही प्रदेश के तमाम महकमों में केंद्रपोषित, बाह्यपोषित योजनाओं और राज्य सेक्टर में योजनावार बजट को चालू वित्तीय वर्ष में पारदर्शिता के साथ खर्च करना होगा।

आउटकम बजट को अंतिम रूप देने में अहम भूमिका निभाने वाले राज्य योजना आयोग के विशेषज्ञ डॉ मनोज कुमार पंत के मुताबिक 90 फीसद से ज्यादा महकमे आउटकम बजट का हिस्सा बन चुके हैं। महकमों ने अपने लक्ष्यों की कितनी पूर्ति की, आउटकम बजट और परफॉरमेंस बजट के जरिए यह सबकुछ जनता के सामने भी होगा।

महकमों की ज्यादा जिम्मेदारी 

वित्त मंत्री प्रकाश पंत के मुताबिक सरकार ने बजट को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने पर जोर दिया है, खासतौर पर बजट खर्च के लिए महकमों को ज्यादा जिम्मेदारी और योजनाबद्ध तरीके से काम करना होगा। बजट में यह व्यवस्था की गई है। भविष्य में इसके सार्थक परिणाम दिखेंगे।

योजनावर तय किए गए लक्ष्य

स्वास्थ्य: इस वित्तीय वर्ष में राज्य की कुल चिह्नित 37 चिकित्सा इकाइयों में टेली रेडियोलॉजी से उपचार उपलब्ध होगा। वर्ष 2020 तक नवजात शिशु मृत्युदर प्रति एक हजार पर 28 से घटाकर 25 किए जाने और मातृ मृत्यु दर प्रति एक लाख पर 135 से घटाकर 100 किए जाने, चिकित्सकों की कमी 2021 तक दूर करने का लक्ष्य है।

शहरी विकास: मुख्य यात्रा मार्गों व बस स्टेशनों पर यात्रियों की सुविधा के लिए एयरकंडीशंड युक्त शौचालय, देहरादून, नैनीताल, हरिद्वार, रुड़की, रामनगर व हल्द्वानी में एडीबीपोषित पेयजल व ड्रेनेज की सुविधा अगले वित्तीय वर्ष तक, नगर निकायों की मलिन बस्तियों में 500 परिवारों के लिए शौचालय।

लोक निर्माण: नई 992 किमी सड़कों का निर्माण, 1375 किमी सड़कों का पुनर्निर्माण, 73 पुलों का निर्माण-जीर्णोद्धार। चिकित्सा शिक्षा: अल्मोड़ा व रुद्रपुर मेडिकल कॉलेजों की स्थापना इसी वर्ष जुलाई तक, चंपावत, बाजपुर, गुप्तकाशी व गहड़ में नर्सिंग स्कूलों की स्थापना मार्च, 2018 तक, हरिद्वार व पिथौरागढ़ में मेडिकल कॉलेजों की स्थापना मार्च, 2018 तक।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button