रुड़की के प्रदीप बत्रा ने राजनीति में पहला कदम रखा और मिलती कई कामयाबी
नगर पालिका अध्यक्ष से कैबिनेट मंत्री तक का सफर
नगर पालिका अध्यक्ष से कैबिनेट मंत्री तक प्रदीप बत्रा का स्वर्णिम सफर
जन केसरी, संवाददाता। राजनीति में कदम रखना आसान है, लेकिन लगातार जीत का सिलसिला बनाए रखना और फर्श से अर्श तक का सफर तय करना सभी नहीं कर पाते हैं। उत्तराखंड की राजनीति में प्रदीप बत्रा एक ऐसा ही नाम बनकर उभरे हैं, जिन्होंने 2008 में राजनीति की दहलीज पर पहला कदम रखा और तब से आज तक कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

प्रदीप बत्रा के राजनीतिक उत्कर्ष की कहानी वर्ष 2008 में शुरू हुई, जब उन्होंने पहली बार चुनाव लड़ा और नगर पालिका परिषद रुड़की के अध्यक्ष चुने गए। बतौर अध्यक्ष उनके कार्यकाल और जनता से सीधे जुड़ाव ने उनकी एक मजबूत जमीन तैयार कर दी। नगर पालिका अध्यक्ष के रूप में अपनी धाक जमाने के बाद बत्रा ने प्रदेश की मुख्यधारा की राजनीति में प्रवेश किया। उनके चुनावी सफर की उपलब्धियां किसी रिकॉर्ड से कम नहीं हैं। वर्ष 2012 में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा और जीतकर सदन पहुंचे। 2017 में रुड़की की जनता ने उनके विकास कार्यों पर मुहर लगाते हुए दोबारा विधायक चुना। वहीं, 2022 (लगातार तीसरी जीत) में विधानसभा चुनावों में जीत की ‘हैट्रिक’ लगाकर उन्होंने साबित कर दिया कि रुड़की की जनता का उन पर अटूट विश्वास है। करीब दो दशक के बेदाग और सफल राजनीतिक करियर के बाद, अब वर्ष 2026 में प्रदीप बत्रा को उनकी मेहनत और अनुभव का सबसे बड़ा फल मिला है। प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाए जाने के बाद रुड़की में जश्न का माहौल है। जानकारों का मानना है कि उनकी यह पदोन्नति न केवल उनके व्यक्तिगत कद को बढ़ाती है, बल्कि रुड़की के विकास को भी नए पंख देगी। वर्ष 2027 में फिर से विधानसभा के चुनाव होने हैं। अब देखना यह है कि पार्टी उनको टिकट देती है या नहीं। प्रदीप बत्रा के लिए भी चौबी बार लगातार जीत दर्ज करने की चुनौती रहेगी।




